घुंघरा नृत्य और मेला गीतों से गूंजा अजयपुरा — गौतम जी मेले की भव्य तैयारियां शुरू

घुंघरा नृत्य और मेला गीतों से गूंजा अजयपुरा — गौतम जी मेले की भव्य तैयारियां शुरू

Ghunghra Dance & Folk Songs Usher in the Grand Gautam Ji Fair in Pindwara

15 अप्रैल 2026, 09:51 AM को अपडेट 10 1 min read

पिंडवाड़ा के मीणा वास अजयपुरा में गौतम ऋषि महादेव के वार्षिक मेले से पूर्व मीणा युवा संगठन द्वारा भव्य मेला गीत कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बुजुर्गों और बच्चों के पारंपरिक घुंघरा नृत्य ने सभी का मन मोह लिया।

पिंडवाड़ा (सिरोही), 13 अप्रैल। राजस्थान की धरती हमेशा से लोक संस्कृति और आस्था की धरोहर रही है। इसी धरोहर को जीवंत रखने का काम हर साल करता है पश्चिम राजस्थान का सबसे भव्य और भावपूर्ण आयोजन — गौतम ऋषि महादेव का वार्षिक मेला। और इस बार भी पिंडवाड़ा शहर के मीणा वास अजयपुरा की गलियां उत्साह, उमंग और परंपरा के रंग में पूरी तरह रंग गई हैं।


मेले से पहले ही गूंज उठीं गलियां

मेला शुरू होने से कई दिन पहले ही अजयपुरा की गली-मोहल्लों और आसपास के गांवों में पारंपरिक मेला गीतों की गूंज सुनाई देने लगी थी। घरों के आंगन हों या चौपाल — हर जगह घुंघरुओं की छनछनाहट और ढोलक की थाप ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।

मीणा समाज में यह परंपरा सदियों पुरानी है। गौतम जी मेले से पहले समाज के लोग एकजुट होकर अपने इष्ट देव की आराधना में लोकगीत और नृत्य का आयोजन करते हैं। यह महज एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही जीवंत परंपरा है।


मीणा युवा संगठन ने सजाई यादगार शाम

12 अप्रैल, रविवार की रात को मीणा युवा संगठन अजयपुरा ने एक भव्य मेला गीत कार्यक्रम का आयोजन किया, जो देर रात तक चला और उपस्थित हर व्यक्ति के मन पर अमिट छाप छोड़ गया।

कार्यक्रम में दूर-दूर से कलाकार पधारे —

  • रामेश्वर मंडल हीरोला टीम — पाली जिले की बाली तहसील से
  • मंछाराम मीणा मालनू टीम — बाली तहसील से
  • आसपास के अन्य गांवों के लोककलाकार

इन सभी ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकगीतों की मधुर धुनों पर जब कलाकारों के कदम थिरके, तो पूरा माहौल भावनाओं से भर उठा।


बुजुर्गों और बच्चों ने लूटी महफिल — घुंघरा नृत्य बना शाम का मुकुट

पूरे कार्यक्रम की सबसे खास और भावुक कर देने वाली प्रस्तुति रही 60 से 70 वर्ष के बुजुर्गों और 15 वर्ष तक के बाल कलाकारों का पारंपरिक घुंघरा नृत्य।

पैरों में घुंघरू बांधे, हाथों में रुमाल थामे, धोती-कुर्ता और रंग-बिरंगी पगड़ी से सजे इन कलाकारों ने जब मंच पर कदम रखा, तो तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गूंज उठा।

बुजुर्गों की थिरकन में जहां दशकों का अनुभव और परंपरा की गहराई झलकती थी, वहीं बच्चों की मासूम अदाओं ने हर दिल को छू लिया। यह दृश्य इस बात का जीवंत प्रमाण था कि मीणा समाज की लोक संस्कृति न केवल जीवित है, बल्कि हर पीढ़ी के साथ और भी निखर रही है।


रात 9 से भोर 3 बजे तक — रुका नहीं उत्साह का सैलाब

कार्यक्रम की शुरुआत रात लगभग 9 बजे हुई और बिना किसी रुकावट के यह आयोजन भोर के 3 बजे तक चलता रहा। न थकान का नाम था, न उत्साह में कोई कमी। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे — सभी पूरी रात इस उत्सव में डूबे रहे।

पिंडवाड़ा ब्लॉक के रोई परगना के दर्जनों गांवों से लोग इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। यह एकता और सामाजिक सौहार्द का भी एक सुंदर उदाहरण था।


धनाराम मीणा कांटल का किया गया सम्मान

इस अवसर पर समाज ने धनाराम मीणा कांटल को विशेष सम्मान दिया, जिन्हें हाल ही में भाजपा एसटी मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। समाज के प्रतिष्ठित पद पर पहुंचने की इस खुशी को सामूहिक रूप से मनाया गया।


आज से शुरू होगा तीन दिवसीय महामेला

गौतम ऋषि महादेव का यह वार्षिक मेला आज से शिवगंज ब्लॉक के चोटिला गांव के पास सुकड़ी नदी के तट पर, अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच आयोजित होगा।

यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मीणा समाज की सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है। सिरोही, पाली और जालौर जिलों से लाखों श्रद्धालु इस तीन दिवसीय महामेले में भाग लेते हैं। अरावली की वादियों में सुकड़ी नदी के किनारे यह दृश्य अपने आप में अविस्मरणीय होता है।


मीणा समाज की संस्कृति — जो कभी नहीं बुझती

इस पूरे आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि शहरीकरण और आधुनिकता की आंधी में भी मीणा समाज ने अपनी जड़ों को मजबूती से थामे रखा है। घुंघरा नृत्य हो, मेला गीत हों या सामूहिक आयोजन — यह सब मिलकर एक ऐसी सांस्कृतिक विरासत बनाते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए गर्व का स्रोत है।

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इस लेख के लेखक
Marwad Live Team
Senior Journalist

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