खांबल में आम्बेडकर जयंती से पहले मूर्ति तोड़ी — समाज में आक्रोश, सदर थाने में FIR दर्ज, नई मूर्ति और गिरफ्तारी की मांग

खांबल में आम्बेडकर जयंती से पहले मूर्ति तोड़ी — समाज में आक्रोश, सदर थाने में FIR दर्ज, नई मूर्ति और गिरफ्तारी की मांग

Ambedkar Statue Vandalized in Khambal Days Before Jayanti — FIR Filed, Community Demands Arrest & Replacement

15 अप्रैल 2026, 09:51 AM को अपडेट 5 1 min read

सिरोही जिले के खांबल गांव में आम्बेडकर जयंती से दो दिन पहले शनिवार रात असामाजिक तत्वों ने मूर्ति का हाथ तोड़ दिया। रविवार सुबह जानकारी मिलते ही लोग एकत्रित हुए और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सदर थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

सिरोही, 12 अप्रैल। संविधान निर्माता और दलित समाज के महानायक डॉ. भीमराव आम्बेडकर की जयंती से मात्र दो दिन पहले सिरोही जिले के खांबल गांव में एक अत्यंत निंदनीय और संवेदनशील घटना सामने आई है। शनिवार की रात असामाजिक तत्वों ने गांव में स्थापित आम्बेडकर की प्रतिमा का एक हाथ तोड़ दिया।

यह घटना न केवल एक मूर्ति को क्षति पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की भावनाओं और आस्था पर सीधा प्रहार है। जयंती के उत्सव की तैयारियों के बीच इस हरकत ने पूरे इलाके में रोष और पीड़ा की लहर फैला दी।

रात के अंधेरे में हुई कायरतापूर्ण हरकत

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह घटना शनिवार देर रात को हुई, जब गांव में सन्नाटा था। असामाजिक तत्वों ने मौके का फायदा उठाते हुए सार्वजनिक स्थल पर स्थापित डॉ. आम्बेडकर की प्रतिमा का एक हाथ तोड़ दिया और फरार हो गए। रात होने के कारण किसी को तत्काल इसकी जानकारी नहीं हो सकी।

सुबह हुआ खुलासा — मौके पर उमड़ी भीड़

रविवार की सुबह जैसे ही ग्रामीणों को इस घटना की भनक लगी, लोग तुरंत प्रतिमा स्थल की ओर दौड़ पड़े। देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग वहां एकत्रित हो गए। खंडित प्रतिमा देखकर लोगों में गहरा दुख और तीव्र आक्रोश भर आया।

यह खबर आग की तरह आसपास के गांवों में भी फैल गई और लोग प्रतिमा स्थल पर पहुंचने लगे। माहौल तनावपूर्ण हो गया और लोगों ने एकजुट होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

पुलिस और प्रशासन पहुंचा मौके पर

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी तत्काल खांबल गांव पहुंचे। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया, घटना की विस्तृत जानकारी ली और आसपास के लोगों से पूछताछ की।

प्रदर्शनकारियों को शांत करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात किया गया। प्रशासन ने लोगों को भरोसा दिलाया कि मामले की जांच गंभीरता से की जाएगी।

प्रदर्शनकारियों ने उठाई दो प्रमुख मांगें

प्रतिमा स्थल के पास एकत्रित लोगों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए दो स्पष्ट और कड़ी मांगें रखीं —

पहली मांग — आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी। लोगों ने मांग की कि इस जघन्य कृत्य के जिम्मेदार असामाजिक तत्वों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

दूसरी मांग — जयंती से पहले नई मूर्ति की स्थापना। लोगों ने मांग की कि 14 अप्रैल को आम्बेडकर जयंती से पहले ही खंडित प्रतिमा के स्थान पर नई और भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए, ताकि जयंती का उत्सव सम्मान के साथ मनाया जा सके।

सदर थाने में दर्ज हुआ मामला

जन दबाव और घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने सदर थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।

घटना के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच भी की जा रही है।

आम्बेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर यह घटना क्यों है गंभीर?

14 अप्रैल को पूरे देश में डॉ. भीमराव आम्बेडकर की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन लाखों लोग उनकी प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ऐसे पवित्र अवसर से ठीक पहले की गई यह हरकत न केवल दलित समाज की भावनाओं को आहत करती है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी चुनौती देती है।

यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए समाज को हमेशा सतर्क रहना होगा।

समाज की एकजुटता — आक्रोश भी, संयम भी

इस पूरे मामले में उल्लेखनीय यह रहा कि लोगों ने अपना विरोध शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से व्यक्त किया। आक्रोश के बावजूद किसी भी प्रकार की हिंसा या अराजकता नहीं हुई। यह समाज की परिपक्वता और कानून पर विश्वास का प्रमाण है।

लोगों की मांग है कि प्रशासन इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।

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इस लेख के लेखक
Marwad Live Team
Senior Journalist

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