राजस्थान में बेमौसम बारिश और ओलों का कहर — गेहूं-सरसों की फसल बर्बाद, किसानों को मुआवजे का इंतजार

राजस्थान में बेमौसम बारिश और ओलों का कहर — गेहूं-सरसों की फसल बर्बाद, किसानों को मुआवजे का इंतजार

Unseasonal Rain & Hailstorm Ravage Crops in Rajasthan — Farmers Await Relief

15 अप्रैल 2026, 09:54 AM को अपडेट 18 1 min read

राजस्थान में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने रबी सीजन की गेहूं, सरसों और जीरे की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। बीकानेर, नागौर, जयपुर समेत 20 से अधिक जिले प्रभावित। मौसम विभाग ने 3-4 अप्रैल को फिर येलो अलर्ट जारी किया।

बीकानेर / जयपुर, 2 अप्रैल 2026। राजस्थान के किसानों के लिए यह रबी सीजन किसी आफत से कम नहीं रहा। एक तरफ महीनों की मेहनत के बाद फसल पककर तैयार हुई, दूसरी तरफ बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में तबाही मचा दी। मार्च के आखिरी हफ्ते से लेकर अप्रैल के पहले हफ्ते तक राजस्थान में मौसम का मिजाज ऐसा बिगड़ा कि किसानों की आंखों के सामने उनकी फसल खेत में ही बर्बाद होती दिखी। अब मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 3 और 4 अप्रैल को एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे प्रदेश में फिर से बारिश और ओलों का दौर शुरू हो सकता है।


पूरे प्रदेश में हुआ नुकसान, बीकानेर भी नहीं बचा

राज्य के पूर्वी जिलों जयपुर, भरतपुर, धौलपुर, अलवर, करौली में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला। वहीं पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जालौर, जैसलमेर और बीकानेर संभाग के कई इलाकों में भी तेज हवाओं और बारिश ने जीरा, ईसबगोल, सरसों और अरंडी की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। बीकानेर के नोखा में सर्वाधिक 25 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। मारवाड़ के किसान पहले से ही महंगे बीज, खाद और डीजल की मार झेल रहे हैं — अब मौसम ने उनकी बची-खुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।


कटी हुई गेहूं भीगी, दाने काले पड़ने का डर

जो फसल कट चुकी थी वह खेतों में ही भीग गई। और जो अभी खड़ी थी उस पर ओले गिरे। गेहूं के दाने काले पड़ने और अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है। कोटपूतली-बहरोड़ इलाके में तो लगभग 5 मिनट तक चने के आकार के ओले गिरे जिसने गेहूं, चना और सब्जियों की फसल को मिट्टी में मिला दिया। किसानों का कहना है कि अब मंडी में इस फसल का सही दाम मिलना मुश्किल होगा क्योंकि गुणवत्ता खराब हो गई है।

भरतपुर के एक किसान हिमांशु सिंह ने बताया कि पूरे साल की मेहनत और पैसा लगाने के बाद जब फसल तैयार हुई तो बारिश सब बर्बाद कर गई। अब घर कैसे चलेगा, कर्ज कैसे चुकाएंगे — यही सोचते रहते हैं।


सरसों, जीरा, ईसबगोल पर भी भारी मार

राजस्थान की पहचान रहे जीरे और ईसबगोल की फसल भी इस बार बुरी तरह प्रभावित हुई है। मार्च के अंतिम सप्ताह में हुई बारिश और ओलावृष्टि से सरसों, जीरा और ईसबगोल में भारी खराबा आया है। इन फसलों पर बाड़मेर, बालोतरा और जालौर के किसान सबसे ज्यादा निर्भर हैं। बाजार में दाम पहले से कम थे और अब गुणवत्ता खराब होने से और भी कम मिलने की आशंका है।


मौसम विभाग का अलर्ट — अभी और आएगी मुसीबत

मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने साफ कहा है कि अभी राहत मिलने वाली नहीं है। 3 अप्रैल को एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा और 3 से 5 अप्रैल तक प्रदेश के कई जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है। 7 अप्रैल को एक और विक्षोभ के आने का अनुमान है। मौसम विभाग ने 20 से अधिक जिलों में येलो अलर्ट जारी कर दिया है। किसानों को सलाह दी गई है कि जो फसल कट चुकी है उसे जल्द से जल्द सुरक्षित जगह पहुंचाएं।


सरकार ने शुरू किया सर्वे, मुआवजे की मांग तेज

राजस्थान सरकार ने फसल नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट आने के बाद नुकसान का सही आकलन हो सकेगा। किसानों को 72 घंटे के भीतर अपनी बीमा कंपनी को नुकसान की सूचना देने की सलाह दी गई है ताकि मुआवजे की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सके।

भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने राजस्थान सरकार से तत्काल उचित मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि बेमौसम बारिश ने किसानों पर कहर ढा दिया है और अगर जल्द राहत नहीं मिली तो हालात और बिगड़ेंगे।


किसान क्या करें अभी?

कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान अभी घबराएं नहीं बल्कि कुछ ज़रूरी कदम उठाएं। जो फसल खेत में पड़ी है उसे तिरपाल या पॉलीथीन से ढकें। कटी हुई फसल को खुले में न छोड़ें। फसल बीमा योजना के तहत नुकसान की सूचना 72 घंटे में दें। स्थानीय पटवारी और कृषि विभाग से संपर्क करें और गिरदावरी करवाएं। जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ली है वे बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर तुरंत कॉल करें।


आगे क्या?

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अप्रैल में इस तरह की बेमौसम बारिश अब आम होती जा रही है। किसानों को अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ मौसम आधारित खेती की तकनीकों को अपनाना होगा। साथ ही सरकार को भी चाहिए कि फसल बीमा की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाए ताकि किसानों को समय पर राहत मिल सके।

राजस्थान का किसान हर साल एक नई चुनौती से लड़ता है — कभी सूखा, कभी टिड्डी, कभी बेमौसम बारिश। लेकिन इस बार मौसम की मार इतनी जल्दी और इतनी तेज आई कि उसके पास संभलने का मौका ही नहीं रहा। अब देखना यह है कि सरकार कितनी तेजी से सर्वे पूरा करके मुआवजा किसानों तक पहुंचाती है।


— Marwad Live डेस्क

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Marwad Live Team
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