जयपुर के शहीद स्मारक पर पत्रकारों के समर्थन में चल रहा धरना लगातार तेज होता जा रहा है। प्रशासनिक कार्रवाई और कथित झूठे मुकदमों के विरोध में इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) के नेतृत्व में यह प्रदर्शन अब दसवें दिन में प्रवेश कर चुका है।
बारिश, उमस और कठिन परिस्थितियों के बावजूद पत्रकारों का यह आंदोलन जारी है, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
10वें दिन भी जारी धरना, अलग-अलग जिलों की सक्रिय भागीदारी
धरने के दसवें दिन हनुमानगढ़ और बारां जिले की इकाइयों ने मोर्चा संभाला। दोनों जिलों के पत्रकार संयुक्त रूप से प्रदर्शन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
खराब मौसम के बावजूद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद पत्रकारों का उत्साह बना हुआ है। लगातार हो रही बूंदाबांदी और उमस के बीच भी धरना जारी रहना आंदोलन की गंभीरता को दर्शाता है।
पत्रकारों का आरोप: कार्रवाई के नाम पर आजीविका पर हमला
प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों का कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई की आड़ में उनकी आजीविका पर सीधा असर डाला जा रहा है। साथ ही, झूठे मुकदमे दर्ज किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
संगठन का मानना है कि सत्ता केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि जनता के भरोसे की जिम्मेदारी भी होती है। ऐसे समय में सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
सरकार और विपक्ष दोनों से अपील, संवाद की मांग तेज
धरना स्थल से सरकार से अपील की जा रही है कि वह अपनी सख्त नीति छोड़कर पत्रकारों के साथ बातचीत करे और समाधान निकाले।
वहीं, विपक्षी दलों से भी यह अपेक्षा जताई गई है कि वे इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाएं और धरना स्थल पर पहुंचकर पत्रकारों का समर्थन करें।
एकजुटता पर जोर, पत्रकारिता के सम्मान का सवाल
संगठन ने साफ कहा है कि यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि पत्रकारिता के सम्मान और स्वाभिमान का मुद्दा है।
यदि इस बार पत्रकार समुदाय एकजुट नहीं हुआ, तो यह केवल एक संघर्ष की हार नहीं होगी, बल्कि पूरे पेशे की प्रतिष्ठा पर असर पड़ेगा। इसलिए सभी पत्रकारों से एक मंच पर आने की अपील की गई है।
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