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आंखों की रोशनी खोकर RAS बने युवा का संघर्ष और सफलता की कहानी

Struggles and Success of Blind Youth Who Became RAS

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सिरोही के एक युवक ने आंखों की रोशनी खोकर भी न केवल RAS परीक्षा में दूसरी रैंक प्राप्त की बल्कि पैरा एथलेटिक्स में भी गोल्ड मेडल जीता। यह कहानी उनके अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प की है।

सिरोही जिले के एक युवक ने अपनी आंखों की रोशनी खो देने के बावजूद जीवन में जो सफलता की ऊंचाइयों को छुआ है, वह प्रेरणादायक है। इस युवा ने न केवल राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) की परीक्षा में ब्लाइंड कैटेगरी में दूसरी रैंक हासिल की, बल्कि पैरा एथलेटिक्स में भी गोल्ड मेडल जीता। यह कहानी उनके अदम्य साहस, संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति की है।

संघर्ष की शुरुआत

जन्म से दृष्टिबाधित न होने के बावजूद, एक गंभीर बीमारी के कारण उन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी। शुरुआती दिनों में उन्हें समाज से कई प्रकार के ताने सुनने को मिले। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और लगातार मेहनत की।

शिक्षा और प्रेरणा

उन्होंने सिरोही के स्थानीय विद्यालय से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद, अपने परिवार और शिक्षकों के समर्थन से उन्होंने उच्च शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया। उनकी सफलता का श्रेय उनके परिवार और दोस्तों की प्रेरणा को भी जाता है।

पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल

शारीरिक चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने खेलों में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल हासिल किया। यह उनकी कठोर मेहनत और समर्पण का परिणाम है।

RAS परीक्षा में सफलता

उनकी उपलब्धियों का सफर यहीं नहीं रुका। उन्होंने RAS परीक्षा में भी भाग लिया और ब्लाइंड कैटेगरी में दूसरी रैंक प्राप्त की। यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, जिससे न केवल उनका बल्कि उनके परिवार का भी गौरव बढ़ा।

स्थानीय और राज्य की प्रतिक्रिया

उनकी इस सफलता ने सिरोही जिले के युवाओं को प्रेरणा दी है। स्थानीय लोगों के बीच यह कहानी चर्चा का विषय बन गई है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से भी उन्हें बधाई संदेश प्राप्त हो रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

एक मनोवैज्ञानिक ने कहा, "इस युवक की कहानी यह दिखाती है कि शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति की सफलता में बाधा नहीं बन सकतीं। अगर दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कुछ भी असंभव नहीं है।"

  • जन्म से दृष्टिबाधित नहीं थे; बीमारी के कारण रोशनी खोई।
  • शिक्षा के लिए परिवार और दोस्तों का मिला समर्थन।
  • पैरा एथलेटिक्स में राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीता।
  • RAS परीक्षा में ब्लाइंड कैटेगरी में दूसरी रैंक प्राप्त की।
  • सिरोही और राजस्थान में प्रेरणा का स्रोत बने।
"अगर दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कुछ भी असंभव नहीं है।"

इस युवक की कहानी न केवल सिरोही बल्कि पूरे राजस्थान के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह दिखाता है कि अगर मन में विश्वास और मेहनत की लगन हो, तो शारीरिक चुनौतियां भी सफलता की राह में बाधक नहीं बन सकतीं। आगे भी वह अपने जीवन में ऐसी ही नई ऊंचाइयां छूने की तैयारी में हैं।

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इस लेख के लेखक
Marwad Live Team
Senior Journalist

Portal Administrator

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